Chinese Defence Ministry Spokesman Wu Qian Warns India On Dokalam Stand-Off

चीन की भारत को धमकी- पहाड़ हिलाना आसान है, हमारी सेना को हटाना नहीं, China’s threat to India – it is easy to move the mountain, not to remove our army

China has warned India once again in the ongoing dispute over Sikkim’s dockyard area.

बीजिंग.

सिक्किम के डोकलाम एरिया को लेकर जारी विवाद के बीच चीन ने भारत को एक बार फिर चेतावनी दी है। चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन और डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ इन्फॉर्मेशन ऑफिस कर्नल वू कियान ने सोमवार को कहा, “चीन डोकलाम में अपनी सेना बढ़ाएगा, हम हर कीमत में अपने क्षेत्र की रक्षा करेंगे।” कियान ने यह भी कहा, “देश की रक्षा करने को लेकर हमारे विश्वास को कोई भी डिगा नहीं सकता, पहाड़ को हिलाना आसान है, लेकिन चीन की सेना को हटा पाना मुश्किल।”भारत किसी गलतफहमी में न रहे…

– कर्नल वू कियान ने कहा, “चीन की संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को लेकर भारत किसी गलतफहमी में न रहे। PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी है और चीनी क्षेत्र की रक्षा की इसकी क्षमता अदम्य (indomitable) है। पीएलए का 90 साल का इतिहास इसकी क्षमता को साबित करता है।”
– उन्होंने कहा, “हम उस इलाके में सेना की तैनाती बढ़ाने को तैयार हैं, जो भारत के नॉर्थइस्टर्न स्टेट सिक्किम के पास है। अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए चीन की इच्छा और संकल्प अदम्य है और हम संप्रभुता की रक्षा हर कीमत पर करेंगे। चीनी सैनिकों ने इलाके में आपात कदम उठाए थे और अब हम इस क्षेत्र में तैनाती और अभ्यास को बढ़ाएंगे।”
– बता दें कि डोकलाम में 39 दिन से भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। ये इलाका एक ट्राई जंक्शन (तीन देशों की सीमाएं मिलने वाली जगह) है। चीन यहां सड़क बनाना चाहता है, लेकिन भारत और भूटान इसका विरोध कर रहे हैं।

विवाद को किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ सकता भारत

– कियान ने कहा, “विवाद के हल के लिए भारतीय सैनिकों की वापसी हमारी पूर्व शर्त है, भारत चीजों को किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ सकता और वह किसी तरह की गलतफहमी में न रहे। डोकलांग (डोकलाम) चीनी क्षेत्र है और अपने क्षेत्र में सड़क बनाना संप्रभुता का काम (act of sovereignty) है।”
– “दोनों तरफ से मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल बॉर्डर को भारतीय सैनिकों द्वारा क्रॉस करना चीनी क्षेत्र का गंभीर अतिक्रमण है, जो इंटरनेशनल लॉ के खिलाफ है। हम भारत से सख्त अपील करते हैं कि वह अपने सैनिकों को वापस बुला ले और अपनी गलती को सही करने के लिए कदम उठाए ताकि बॉर्डर पर शांति कायम रहे।”
सुषमा ने राज्यसभा में क्या कहा था?
– भारत की फॉरेन मिनिस्टर सुषमा स्वराज ने 21 जुलाई को राज्यसभा में कहा था, “चीन अगर सिक्किम में ट्राई-जंक्शन में स्टेटस-को में बदलाव करता है तो इसे भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती माना जाएगा। स्टेटस-को यानी यथास्थिति बनाए रखना है। ट्राईजंक्शन पर भारत, चीन और भूटान की सेनाएं फिलहाल अपनी-अपनी सीमा में हैं। लेकिन चीन की आर्मी, भारत के काफी करीब है।”
– “जैसे ही पता चला कि OBOR (वन बेल्ट वन रोड) में वो CPEC (चाइना-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर) को डाल रहे हैं। तो हमने उसी समय विरोध दर्ज कराया था। डोकलाम में एक ट्राईजंक्शन है और 2012 में एक लिखित समझौते के तहत फैसला हुआ था कि इसमें कोई भी फेरबदल भारत, चीन और भूटान के बीच चर्चा के बाद ही होगा।”
– “चीन लगातार वहां आता रहा है। कभी डेवलपमेंट के लिए, कभी किसी और काम के लिए। लेकिन इस बार वे सीधे ट्राईजंक्शन प्वाइंट पर आ गए। कोई भी एकतरफा फैसला हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा है। चीन के साथ सैन्य गतिरोध इसलिए बना हुआ है क्योंकि वह लगातार कह रहा है कि भारत अपनी आर्मी को वापस अपनी सीमा में बुलाए। चीन की बात मानना संभव नहीं है। हमारा प्वाइंट सही है और दुनिया के बाकी देश इस बात को समझ रहे हैं।”
डोभाल इसी महीने जाएंगे चीन
– भारत के नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल जुलाई के आखिर में BRICS मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग जाएंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान डोभाल चीनी पक्ष से सिक्किम बॉर्डर विवाद पर बात कर सकते हैं। ब्रिक्स मीटिंग 27-28 जुलाई को होनी है।

क्या है डोकलाम विवाद?

– ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है। भारत ने 16 जुलाई को सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि वह इस इलाके में पीछे नहीं हट सकता। डोकलाम में चीन को सड़क बनाने नहीं दिया जाएगा। भारत ने चीन की इस वॉर्निंग को नजरअंदाज कर दिया है कि भारत अपने सैनिक वहां से तुरंत वापस बुला ले, नहीं तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
– इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से कहा गया है कि जब तक चीन के सैनिक सड़क निर्माण से पीछे नहीं हटते, भारतीय सैनिक नॉन काम्बैट मोड में डोकलाम में डटे रहेंगे। उधर, चीनी मीडिया ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत की पूर्व शर्त भारतीय सैनिकों का डोकलाम से पीछे हटना है। इस मामले में मोलभाव के लिए कोई जगह नहीं है।

बॉर्डर पर दोनों देशों के सैनिक 100 मीटर पर आमने-सामने

– इंडियन आर्मी के जवानों ने चीनी सैनिकों के अड़ियल रवैये को देखते हुए सिक्किम के डोकलाम इलाके में 9 जुलाई से अपने तंबू गाड़ रखे हैं। बॉर्डर पर दोनों देशों की 60-70 सैनिकों की टुकड़ी 100 मीटर की दूरी पर आमने-सामने डटी हैं। दोनों ओर की सेनाएं भी यहां से 10-15 km की दूरी पर तैनात हैं।

भारत का क्या है तर्क?

– नई दिल्ली ने चीन को बताया है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा।
– इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।

 

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