Nagaur News: District Consumer Forum, Vehicle Insurance Companies Claims Dismissed

Auto insurance companies engaged in reducing premium for customers; ग्राहकों का प्रीमियम डकारने में लगी वाहन बीमा कम्पनियां

सुरक्षा का भरोसा देकर वाहनों का बीमा करने वाली कम्पनियां अपने ग्राहकों को टरकाने में लगी हुई हैं। क्लेम की स्थिति बनने पर बीमा कम्पनियों के अधिकारी व कर्मचारी छोटी-छोटी कमियां बताकर वाहन मालिक को नियमों की अवहेलना का हवाला देकर दावा निरस्त कर देती हैं। यदि कोई वाहन मालिक जागरूक है और न्यायालय में जाने की हिम्मत दिखाता है तो ठीक अन्यथा वाहनों के बीमा की प्रीमियम राशि कम्पनियां डकार कर मालामाल हो रही हैं। इसका खुलासा पत्रिका द्वारा की गई पड़ताल में हुआ है।

दरअसल, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच में हर माह 5 से 10 प्रकरण वाहन बीमा क्लेम से सम्बन्धित दायर हो रहे हैं और उपभोक्ता मंच भी ज्यादातर मामलों में बीमा कम्पनी को सेवा में दोषी ठहराते हुए उपभोक्ताओं को राहत प्रदान कर रहा है। गुरुवार को उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष ईश्वर जयपाल, सदस्य राजलक्ष्मी आचार्य व बलवीर खुडख़ुडिय़ा ने एक ही दिन में वाहन बीमा कम्पनियों से चार प्रकरणों के निर्णय सुनाए, जिनमें से 3 में उपभोक्ताओं को राहत प्रदान कर बीमा कम्पनी को सेवा का दोषी माना।

उपभोक्ता मंच में दायर वाहन बीमा के मामले

जनवरी : कुल – 43, वाहन बीमा – 9
फरवरी : कुल – 22, वाहन बीमा – 2
मार्च : कुल – 36, वाहन बीमा – 5
अप्रेल : कुल – 19, वाहन बीमा – 2
मई : कुल – 23, वाहन बीमा – 9
जून : कुल – 17, वाहन बीमा – 4
(जुलाई में अब तक वाहन बीमा के 5 प्रकरणों का निर्णय आ चुका है, जिसमें चार में कम्पनी को सेवा का दोषी मानते हुए उपभोक्ता को राहत दी है।)

केस एक

नागौर के पीपली गली मोहल्ला निवासी कन्हैयालाल सोनी ने उपभोक्ता मंच में परिवाद दायर कर दी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड जोधपुर कार्यालय के मण्डल प्रबन्धक एवं कम्पनी के डीडवाना रोड स्थित कार्यालय के शाखा प्रबन्धक को सेवा कर दोषी बताकर राहत की मांगी। परिवादी ने बताया कि कम्पनी ने गैर वाजिब कारण बताकर उसका दावा खारिज कर दिया। मंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद परिवादी को राहत देते हुए बीमा कम्पनी को आदेश दिए कि परिवादी को 3,47,858 रुपए में से 40 प्रतिशत राशि कम कर शेष राशि परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से ब्याज सहित अदा करें। इसके साथ मानसिक संताप के 10,000 तथा परिवाद व्यय के 5,000 रुपए अदा करने के आदेश दिए।

केस दो

मेड़ता सिटी निवासी प्रवीण कुमार जैन ने नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड से बीमित वाहन का दुर्घटनागस्त होने के बावजूद क्लेम पारित नहीं करने पर नया दरवाजा नागौर कार्यालय के शाखा प्रबन्धक को सेवा का दोषी बताते हुए राहत मांगी। उपभोक्ता मंच ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद परिवाद स्वीकार करते हुए वाहन बीमा कम्पनी को सेवा का दोषी माना तथा परिवादी को 3,31,123 रुपए में से 40 प्रतिशत राशि कम कर शेश 60 प्रतिशत राशि परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक संताप के 10 हजार तथा परिवाद व्यय के 5 हजार रुपए अदा करने के निर्देश दिए।

केस तीन

डीडवाना के छोटी बेरी निवासी खाजू खां पुत्र उम्मेद खां ने बीमित वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्लेम का दावा पेश किया, लेकिन बीमा कम्पनी ने उसका दावा खारिज कर दिया। इस पर खाजू खां ने उपभोक्ता मंच में परिवाद दायर कर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी के चैन्नई स्थित प्रधान कार्यालय के महाप्रबन्धक/प्राधिकृत अधिकारी, बीकानेर मंडल प्रबंधक एवं कम्पनी के नागौर कार्यालय के शाखा प्रबन्धक को सेवा का दोषी करार देते हुए राहत की मांग की। मंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीमा कम्पनी को आदेश दिए कि वह परिवादी को 2,00,780 रुपए में से 40 प्रतिशत राशि कम कर शेष राशि परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से 9 प्रतिशत ब्याज की दर से अदा करें। साथ ही परिवादी को मानसिक संताप के 10 हजार तथा परिवाद व्यय के 5 हजार रुपए अदा करने के आदेश दिए।

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