Religious: Guru Purnima Ka Mahatva In Hindi, Importance Of Guru Purnima

जानें, क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व, कैसे हुई इसकी शुरुआत

Guru Purnima एक ऐसा पर्व है जो गुरुओं के सम्मान के लिए है। यह महान पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

जयपुर

Guru Purnima एक ऐसा पर्व है जो गुरुओं के सम्मान के लिए है। यह महान पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। कहते हैं जैसे सूर्य की गर्मी से तपती भूमि को बारिश से शीतलता और फसल पैदा करने की शक्ति मिलती हैऐसे ही गुरु गुरु मानव को अज्ञानता के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है आैर भविष्य संवारता है इसलिए उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है।

क्या है मान्यता

हिंदू धर्म में Guru Purnima का विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के अवतार वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इन्होंने महाभारत आदि कई महान ग्रंथों की रचना की। कौरवपाण्डव आदि सभी इन्हें गुरु मानते थे इसलिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा व व्यास पूर्णिमा कहा जाता है।

ऐसे शुरु हुआ सम्मान

प्राचीन काल में जब बच्चे गुरुकुल या गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते थे। उस समय बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती थी। विद्या अध्ययन के बदले शिष्य गुरु पूर्णिमा के दिन वे श्रद्धाभाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करते थे। कहते हैं जिस प्रकार आषाढ़ की घटा बिना भेदभाव के सब पर जलवृष्टि कर जनजन का ताप हरती हैउसी प्रकार विश्व के सभी गुरु अपने शिष्यों पर इस पावन दिन में आशीर्वाद की वर्षा करते हैं।

इस दिन का विशेष महत्व

आषाढ़ की पूर्णिमा के दो प्रभाग हैं। पहला यह कि यह पूर्णिमा सबसे बड़ी मानी जाती है। इस में चंद्र की कला तथा ग्रहनक्षत्र विशेष संयोग लिए होते हैं। दूसरा यह कि इस दिन से श्रावण मास की शुरुआत होती है। शास्त्र में इस दिन का विशेष महत्व हैक्योंकि आषाढ़ी पूर्णिमा अवंतिका में अष्ट महाभैरव की पूजन परंपरा से भी जुड़ी है। इस दिन गुरुओं के चरणों के पूजन का भी विधान है। गुरु पद पूजन परंपरा का निर्वाह इसलिए करते हैताकि बच्चों में बुद्धि वृद्धि हो।

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