Religious News: Unique rituals of nauka vihar at jharkhand-mahadev-temple in jaipur

Jharkhand-mahadev-temple in jaipur: पचपन साल से हो रहा अनूठा नौका विहार, मध्य प्रदेश से मंगवाए जाते हैं केले के

जयपुर स्थित क्वींस रोड़ पिछले पचपन साल से झाडख़ंड महादेव मंदिर में हो रहे अनूठे आयोजन का साक्षी बन रहा है। सावन के चौथे सोमवार को होने वाले इस आयोजन का नाम है नौका विहार झांकी। जिसमें बाबा झाडख़ंडनाथ को नौका में विहार करवाया जाता है जिसके दर्शन करने हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

झाडख़ंड महादेव मंदिर में सावन के चौथे सोमवार को नौका विहार की झांकी सजाई जाती है। जिसके दर्शन के लिए शहर के कोने-कोने से भक्त आते हैं। इस बार भी चौथे सोमवार को शानदार आयोजन किया गया। एक दिन पहले से ही मंदिर में तैयारी शुरू हो गई थी। प्रवेश द्वार को पत्तों व फूलों से सजाया गया।

बताया जाता है कि पांच दशक पहले इस झांकी की शुरुआत रामनाथ शर्मा ने करवाई थी। रेलवे स्टेशन के पास रहने वाला यह शिव भक्त बचपन से ही मंदिर में आता था। बड़े होने पर भी उनकी आस्था बरकरार रही। साधारण कामकाज के जरिए परिवार का पालन पोषण करने वाले रामनाथ के बारे में लोग बताते हैं कि वे सालभर सोमवार को क्वींस रोड स्थित झाडख़ंड महादेव मंदिर जलाभिषेक करने आते। मंदिर में सोमवार को आने के कारण वे शहर से बाहर भी नहीं जाते थे। अपनी कमाई से पाई-पाई जोड़कर सावन के चौथे सोमवार को नौका विहार की झांकी की व्यवस्था करते। यह सिलसिला नब्बे के दशक के अंतिम सालों तक बराबर चलता रहा। तबीयत बिगडऩे पर उन्होंने बब्बू सेठ मेमोरियल ट्रस्ट (मंदिर ट्रस्ट) से आग्रह कर यह जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। उनका यही कहना था कि सावन में जो परंपरा शुरू हुई है वह खत्म नहीं होनी चाहिए। उधर, मंदिर ट्रस्ट ने भी उनकी बात का मोल रखा आज तक उसे निभाया जा रहा है। हर साल नौका विहार की झांकी होती है।

मध्य प्रदेश से मंगवाते केले के तने
18 फीट लंबी, 6 फीट चौड़ी व डेढ़ फीट ऊंची लकड़ी की नाव बनाई जाती है। उसे पहले रंग-बिरेंगे कागज-कपड़े फिर फूलों से सजाया जाता है। झांकी के लिए विशेष रूप से बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) से केले के तने मंगवाने जाते हैं। गर्भगृह में पानी भी भरा जाता है ताकि माहौल पूरी तरह तालाब जैसा लगे।

इन फूलों से होता शृंगार
गुलाब, गुलदाउदी, मोगरा, जूही, गेंदा, हजारे।
खास-खास
-शाम 7 से रात 12 बजे तक होती विशेष झांकी।
-सुबह 8 से शाम 5 बजे तक झांकी का निर्माण होता।
-दिनभर 4 कारीगर जुटे रहते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *