शरद पूर्णिमा:Salasar Balaji lakkhi Mela 2017

Salasar Balaji lakkhi Mela 2017:शरद पूर्णिमा,सालासर बालाजी का लक्खी मेला परवान है।

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सीकर. सालासर बालाजी का लक्खी मेला परवान पर है। शरद पूर्णिमा का बुधवार को मुख्य मेला भरेगा। चहुंओर से आस्था का सैलाब उमड़ेगा। लक्खी मेले के अवसर पर जानिए बालाजी की प्रतिमा की स्थापना कैसे हुई?

Salasar Balaji Temple: सालासार बालाजी का इतिहास

-बताया जाता है नागौर जिले के गांव आसोटा तत्कालीन जागीरदार, संत मोहनदास के दर्शनार्थ उनके घर सालासर आए थे।
-मोहनदास जी हनुमानजी के परम भक्त थे। उन्होंने जागीरदार से हनुमानजी की मूर्ति बनवाकर भिजवाने का आग्रह किया।
-बाद में आसोटा गांव में एक किसान अपने खेत में जुताई कर रहा था। इस दौरान उसके हल का फाल किसी वस्तु में अटक गया।
-उसने बैलों को रोककर खुदाई की तो जमीन में हनुमानजी की प्रतिमा मिली। किसान ने प्रतिमा मिलने की सूचना तत्कालीन जागीरदार को दी।
-जागीरदार प्रतिमा अपने घर ले गया और विश्राम करने लगा। इस दौरान जागीरदार की आंख लग गई।
-बताते हैं कि गहरी नींद में सोए को आवाज सुनाई दी कि ‘मैं भक्तमोहनदास के लिए प्रकट हुआ हूं। मुझे तुरंत सालासर पहुंचाओ’।
-जागीरदार को संत मोहनदास से हुई वार्ता याद आई। उन्होंने ग्रामीणों को बुलाकर सारी बात बताई। प्रतिमा को रथ में विराजित कर रवाना हुए।
-ग्रामीणों के साथ कीर्तन करते हुए आसोटा से सालासर पहुंचे बैल संत मोहनदास के धूणे के पास आकर रुक गए। जहां उसी दिन प्रतिमा की स्थापना की गई।3
-मंदिर प्रबंधन की हनुमान सेवा समिति के अनुसार विक्रम सम्वत 1811 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को शनिवार के दिन मंदिर की स्थापना की गई थी।

Salasar Balaji Temple:चूरमे का भोग लगाकर मांगते हैं मन्नत

सालासर धाम का लक्खी मेला शरद पूर्णिमा को भरता है। मुख्य मेले के दिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। शरद पूर्णिमा पूरा सालासर धाम सिंदूरी रंग में रंगा नजर आता है। श्रद्धालु बाबा को लड्डू, पेड़े और चूरमे का भोग लगाकर रिझाते हैं।

Salasar Balaji Temple:सालासर के रास्ते पर नजर आते हैं ऐसे नजारे

हाथ में निशान, मुख पर जय बाबे की, चाह बाबा के दरबार में धोक लगाने और मन्नोती मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह। हर कोई आस्था की डोर के सहारे खींचा चला जाता है। सिंदूरी रंग में रंगे बाबा के इन भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। ऐसे नजारे शरद पूर्णिमा के उपलक्ष्य में भरने वाले लक्खी मेले के दौरान सालासर बालाजी धाम की ओर जाने वाले हर रास्ते में पग पग पर नजर आते हैं।

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