Shekhawati news: govt crore rupees project not implement

शेखावाटी में 800 करोड़ का निवेश सरकारी वादों में डूबा, युवाओं के सपने एक बार फिर बने सपने

Investments related to the expectations of the unemployed and its development have been entangled in the paper. More than 800 crores investment was invested in Shekhawati.

बेरोजगारों की उम्मीदों और यहां के विकास से जुड़ा निवेश कागजों में उलझ गया है। शेखावाटी में 800 करोड़ से अधिक के निवेश का एेलान हुआ था।
बेरोजगारों की उम्मीदों और यहां के विकास से जुड़ा निवेश कागजों में उलझ गया है। रिसर्जेट राजस्थान में हुई शेखावाटी की ज्यादातर घोषणाएं अभी धरातल पर नहीं आ सकी है। शेखावाटी में 800 करोड़ से अधिक के निवेश का एेलान हुआ था। लेकिन ज्यादातर प्रोजेक्ट जमीन की दिक्कतों में उलझ गए है। इसके बाद भी सरकार उद्यमियों की परेशानियों के समाधान के लिए कोई पहल नहीं कर रही है। इसका खामियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड़ रहा है। यदि निवेश धरातल पर आए तो यहां के बेरोजगारों को यही पर रोजगार मिल सकता है। शेखावाटी में होटल व सीमेन्ट फैक्ट्री **** अन्य के लिए निवेशकों ने पहल की थी। पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी नीमकाथाना क्षेत्र में टाइल्स फैक्ट्री के लिए एक कंपनी ने काफी पहल की थी। लेकिन सरकार की सुस्ती के कारण निवेशक गुजरात चले गए। इसका खामियाजा शेखावाटी के लोगों को भुगतना पड़ा|

इसलिए आए निवेशक आगे 

होटल समूह के निवेशकों ने सबसे ज्यादा रुचि शेखावाटी में दिखाई। क्योकि सालासर, खाटूश्यामजी, जीणमाता, शाकम्भरी व हर्ष अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष हजारों लोग आते है। वहीं यहां मण्डावा कई स्थानों पर फिल्मों की शूटिंग के लिए मुम्बई से टीम आती है। इस कारण भी निवेशकों ने यहांरुचि दिखाई।

ये दिखाए सपने

रिजसेज़्ट राजस्थान के तहत सीकर व झुंझुनंू जिले में आठ बड़े होटल के लिए एमओयू साइन हुआ था। लेकिन भू-उपयोग परिवतज़्न, सड़क निमाज़्ण व बिजली संबंधी दिक्कतों के कारण निवेशक आगे कदम नहीं बढ़ा पा रहे है। निवेशकों का मानना है कि मूलभूत सुविधाओं के बिना निवेश से कोई फायदा नहीं होने वाला। झुंझुनूं जिले में तो सरकार सीमेंट फैक्टी के जमीन विवाद के मामले को अब तक नहीं निपटा सकी है।

 

जनप्रतिनिधियों की सुस्ती

शेखावाटी में अटके निवेश को लेकर यहां के जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं है। उद्यमियों के छोटे-छोटे काम सरकारी सिस्टम में उलझे हुए है। यदि जनप्रतिनिधि उद्यममियों से बातचीत कर समाधान की पहल करें तो कुछ राह खुल सकती है। पिछले दिनों शेखावाटी दौरे पर आए उद्यमियों ने भी मीडिया से बातचीत में जनप्रतिनिधियों पर जमकर आरोप लगाए थे।

सुविधाओं का दिया लालच

रिसजेज़्ट राजस्थान से पहले सरकार ने उद्यमियों को लुभाने के लिए तो काफी प्रयास किए गए। लेकिन ग्रास रूट पर कुछ नहीं किया गया। इस कारण उद्यमियों का अब चुनौतियों से सामना हो रहा है। हालत यह है कि अब कई उद्यमियों को जमीन नहीं मिल पा रही है। यदि कही जमीन मिल गई तो किस्त परिवतज़्न में मामला उलझा हुआ है। यदि सरकार पहले निवेशकों के लिए यह तैयारी करती तो अब उद्यमियों को दिक्कत नहीं आती।

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