Tanga Race In Nagaur Rajasthan

Tanga Race In Nagaur:तांगा दौड़ : जन आक्रोश रैली निकालकर उड़ाएंगे सरकार की नींद

नागौर. राजस्थान के नागौर जिले में दो साल पहले बंद करवाई गई तांगा दौड़ को लेकर सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ आगामी 9 अगस्त को सर्व समाज के लोग खरनाल में जन आक्रोश रैली निकालकर सरकार की नींद उड़ाएंगे। आयोजकों ने आक्रोश रैली के दौरान खरनाल में नागौर-जोधपुर हाइवे को जाम करने की चेतावनी भी दी है।

Nagaur News:तांगा दौड़ के मुद्दे पर बेनीवाल के समर्थन में आए नागौर विधायक हबीबुर्रहमान

तांगा दौड़ करवाने के समर्थकों की चेतावनी के बाद पुलिस एवं प्रशासन के हाव-पांच भी फूलने लगे हैं। गत दिनों आनंदपाल सिंह प्रकरण के बाद अब तांगा दौड़ समर्थकों की चेतावनी एवं गत वर्ष खींवसर विधायक बेनीवाल द्वारा की गई घोषणा के चलते यदि राज्य सरकार ने दौड़ की अनुमति नहीं दी तो मेलों के दौरान जनता व पुलिस-प्रशासन एक फिर आमने-सामने होंगे।

गौरतलब है कि जिले के खरनाल में भरने वाले वीर तेजाजी के मेले, मुंदियाड़ में भरने वाले गजानंद जी के मेले एवं कुम्हारी-बासनी के बाला पीर उर्स में वर्षों से चली आ रही तांगा दौड़ को फिर से शुरू कराने की मांग को लेकर पिछले काफी समय से ज्ञापन देकर राज्य सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की जा रही है।

Tanga Race In Nagaur : नागौर में तांगा दौड़ को लेकर अब आई ये खबर, जगी उम्मीद…

इसको लेकर खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल सहित नागौर विधायक हबीबुर्रहमान, जायल विधायक डॉ. मंजू बाघमार एवं भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष व बायतु विधायक कैलाश चौधरी ने मुख्यमंत्री व राज्यपाल को पत्र लिख चुके हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई भी मैसेज नहीं दिया गया है, जिसको लेकर नागौर के लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। इस बात संदेश नागौर विधायक ने अपने पत्र में भी किया था।

विधायकों का कहना है कि तांगा दौड़ 36 कौम की आस्था से जुड़ा मामला है, जिसे तमिलनाडु के जल्लीकट्टू की तर्ज पर अध्यादेश लाकर शुरू करवाया जाना चाहिए। विधायकों ने यह भी बताया कि तांगा दौड़ में प्रशिक्षित कोचवान भाग लेते हैं और घोड़ों को मेडिकल जांच के बाद ही दौड़ में शामिल किया जाता है, ऐसे में इस दौड़ में पशु कू्ररता जैसी बात करना बेमानी है।

Nagaur News:जनभावना का ध्यान रखना जरूरी

विधायकों ने अपने पत्रों में बताया कि वर्ष 2014 में कुछ लोगों द्वारा पशु क्रूरता के नाम पर राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज करवा दी गई, जिस पर उच्च न्यायालय ने जीव जन्तु कल्याण बोर्ड चैन्नई और पशु क्रूरता निवारण समिति को मामले में क्रूरता होती है या नहीं, जांच कर रिपोर्ट पेश करने के लिए निर्देशित किया था, जिसमें बोर्ड एवं समिति ने पशु क्रूरता होना बताया।

जल्लीकट्टू खेल Vs तांगा दौड़

यहां ये देखना उचित है कि पिछले दिनों तमिलनाडू सरकार द्वारा एक अध्यादेश लाकर वहां के पाम्परिक जल्लीकट्टू खेल को वापस शुरू करवाया एवं महाराष्ट्र राज्य में सरकार ने एक अध्यादेश पास कर बैलों की दौड़ को जायज ठहराया तथा उसे फिर से शुरू करवाया। जिस प्रकार तमिलनाडू व महाराष्ट्र की सकरार ने न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद जनभावना का सम्मान रखते हुए अध्यादेश लाकर दोनों खेल शुरू करवाए। ठीक उसी प्रकार नागौर जिले के विभिन्न मेलों में होने वाली तांगा दौड़ लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी है, जिसे तुरंत प्रभाव से अध्यादेश लाकर शुरू करवाया जाना चाहिए।

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